Monday, August 8, 2016

दुरस्त पाचन तंत्र, उत्तम स्वास्थय प्राप्ति का एक महत्व पूर्ण स्तम्भ है. अगर व्यक्ति का पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करे तो वह पेट दर्द, कब्ज, पेट के घाव (अल्सर),कील मुहांसे व वायु-विकार (गैस बनना) आदि अनेक व्याधियों से बच सकता है
विशेष जानकारियाँ:
१. भोजन से  आधा घंटे पूर्व व पश्चात् पानी न      पिए |
२. रात में गरिष्ठ भोजन का सेवन न करें |
३. भोजन के तुरंत बाद लेटें नहीं |
४. नियमित योगाभ्यास करें |
५. फ़ास्ट फ़ूड या जंक फ़ूड  से बचें |
६. अधिक रेशे वाले पदार्थों का सेवन करें |
कारण व उपचार :
अधिक मात्रा में तथा असमय भोजन करने, प्रकृति विरुद्ध पदार्थों के  सेवन व तनाव आदि  के फलस्वरूप पाचन तंत्र  बिगड़ जाता है. इसे दुरस्त करने के लिए हम एक दो समय का उपवास करते है या कुछ एंटासिड (अम्ल-
रोधी) गोलियां खा लेते है. इन सबसे से लाभ तो होता है पर यह अस्थायी होता है.
स्थायी उपचार :
हालाँकि,अपने दैनिक जीवन-चर्या में समूल परिवर्तन करना बड़ा कठिन है फिर भी अपने पाचन तंत्र को सशक्त बनाने व पुनर्जीवन प्रदान करने के लिए कुछ प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है. शरीर को अपनी पूर्व स्वस्थ अवस्था में लौटाने में योग(Yoga) से अधिक कारगर कोई और उपाय हो नहीं सकता. यह किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव से रहित एक प्रामाणिक तकनीक है  जो जीवन चर्या में बिना कोई  विशेष परिवर्तन के, शरीर को प्राकृतिक व सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ करने में सक्षम है.
निम्न योगासनों(Yogasana) का  अभ्यास उदर सम्बन्धी अंगो को शिथिलता प्रदान कर, उनको तनाव मुक्त कर, पाचनतंत्र को स्वस्थ सुचारू व सक्रिय बनाता है:

उस्ट्रासन(Camel pose)
उस्ट्रासन शरीर के अग्र-भाग में खिंचाव उत्पन्न करता है जिससे उदार के सभी अंग सक्रिय हो जाते है. यह आसन शारीरिक मुद्रा (उठते बैठते समय शरीर की स्थिति ) को संतुलित करता है, तथा महिलाओं को मासिक स्त्राव में होने वाले कष्ट से मुक्ति प्रदान करता है

पद्मासन(Lotus pose) (Lotus pose)
यह बैठ किया जाने वाला एक सरल आसन है जो पाचन क्रिया को उन्नत करता है , मांसपेशियों के तनाव को कम करता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है.


धनुरासन (Dhanurasana) (Bow pose)
धनुरासन(Dhanurasana) उदर की मांसपेशियों में खिंचाव कर उन्हें बल प्रदान करता है. इससे शरीर कब्ज से मुक्त होता है और मासिक धर्म के कष्ट से भी छुटकारा मिलता है.

नौकासन(Naukasana) (Boat pose)
यह आसन भी पेट के समस्त अंगो को बल प्रदान करता है जिसके फलस्वरूप पाचन क्रिया में सुधार होता है. यह शरीर में इकट्ठे हुए तनाव  को कम करता है तथा पीठ को सुदृढ़ करता है.


सेतुबंधासन (SetuBandhasan) (Bridge pose)
यह आसन पेट की मांसपेशियों को उत्प्रेरित करता है जिससे पाचन बेहतर होता है. इस के अभ्यास से व्यक्ति तनाव ,निराशा व चिंता से मुक्त हो जाता है.

पवन मुक्तासन (Pavanamuktasana)(Wind relieving pose)
पवन मुक्तासन(Pavanamuktasana) से उदर के अंगों की मालिश होती है और उन्हें बल प्राप्त होता है. यह शरीर में जमा होने वाली वायु के निस्सरण में सहायक है और पाचन क्रिया को उद्दीप्त करता है.                                                                                                              Practice yoga postures at home after learning it under the guidance of an Yoga teacher.

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