Friday, May 6, 2016

ज्ञान के मोती....
.
प्रश्न : अष्टावक्र गीता में आपने कहा है,‘आप शास्त्रों को पढ़ते जाईये, लेकिन आपको मोक्ष तभी प्राप्त होगा जब अप शास्त्रों को भूल जायेंगे’| तो फिर शास्त्र पढ़ने का क्या फ़ायदा है?
.
श्री श्री रविशंकर : देखिये, आप एक बस में चढ़ते हैं, लेकिन फिर आपको बस से उतरना भी पड़ता है|
अब यदि आप मुझसे बहस करेंगे, कि ‘अगर मुझे बस में से उतरना ही है, तो मैं बस में चढूं ही क्यों?’
अरे आप बस में चढ़ते कहीं और हैं और उतरते कहीं और हैं|
अगर आपको बस में से उतरना ही है, तो बस में चढ़े क्यों – यह तर्क तो यहाँ सही नहीं है|
इसलिए, शास्त्र आपको आपकी प्रकृति के बारे में समझाते हैं, इस सृष्टि की प्रकृति के बारे में समझाते हैं, इस मन की प्रकृति के बारे में, जो छोटी छोटी बातों में उलझ जाता है, और आपको एक विशाल दृष्टिकोण देते हैं|
इसलिए, ज्ञान साबुन के समान है| देखिये, आप अपने शरीर पर साबुन लगाते हैं, लेकिन एक समय पर आप उसे धो भी देते हैं, है न?
उसी तरह, आपके मन में यह इच्छा है, ‘मुझे मोक्ष प्राप्त करना है’, और यह इच्छा आपको बाक़ी छोटी-छोटी इच्छाओं से दूर ले जाती है| लेकिन यदि आप इसी विचार को पकड़ के बैठ जायेंगे, तब ये भी किसी न किसी समय आपकी मुसीबत का कारण बन जायेगी| आपको इसे भी धो देना है, और मुक्त हो जाना है|
‘मुझे मोक्ष चाहिये, मुझे मोक्ष चाहिये, मुझे मोक्ष चाहिये’ – तब आपको मोक्ष नहीं मिलेगा| लेकिन बाकी छोटी छोटी इच्छाओं से मुक्ति पाने के लिए, इस एक इच्छा का होना ज़रूरी है| तब फिर एक समय आता है, जब आप कहते हैं, ‘अब अगर मुझे मोक्ष मिलना है, तो ठीक है, नहीं तो जैसी आपकी मर्ज़ी’|
उस पल आप मुक्त हो गए हैं!

No comments:

Post a Comment