Tuesday, April 12, 2016

Shanti

प्रश्न: अव्यवस्था के बीच शांति कैसे खोंजे?
श्री श्री रवि शंकर:
जीवन में अव्यवस्था के बीच शांति ढूँढना ही चुनौती है। अभी यहाँ पर भी बहुत शोर है और आप में से बहुत से लोग इस शोर से परेशान हो रहे होंगे, (दर्शकों में से कुछ ने अपना हाथ उठाकर इस बात से सहमति जताई)
आप में से और भी कई लोग इस शोर से परेशान हैं पर अपना हाथ बढ़ाने से हिचक रहे हैं।
यहीं पर ज़िन्दगी जीने की कला शुरू होती है, शोर है पर आप उससे स्वीकार कर पा रहे हैं और शांत हैं.|
मान लीजिये आप यातायात में फंसे हुए हैं |अब आपके पास २ विकल्प हैं|
१.आप हताश हो जाओगे या
२. आप अपना समयं किसी योजना बनाने में, कुछ पड़ने में या संगीत सुनने में व्यतीत कर सकते हैं |
ज़िन्दगी में बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है पर समझदारी इसी में हैं क उससे स्वीकार करें और एक मुस्कान के साथ उस चुनौती को पूरा करें |
विश्व में लोगो को बहुत कष्ट है और बहुत सारी आपदाओं का सामना भी कर रहें हैं | ये देख कर मेरे दिल को बहुत ठेस पहुँचती है|
पर अब ये वक़्त है के बीते कल को भूल कर आगे बड़ो एक नए विश्वास और आस्था के साथ| यही ज़िन्दगी जीने की कला है|
हमें एक खुशियों की एक लहर पैदा करनी है| बौद्ध धर्म में एक प्राथना है ,"रक्खन्तु सब्बा देवता " जिसका मतलब है "सभी देवी देवताओं हमारी रक्षा करें "
भारत में हम कहते हैं "सर्वे भवन्तु सुखिनः " जिसका मतलब है "सभी खुश रहें "
इसलिए हम सब के लिए एक ख़ुशी की लहर लहर लेके आना सबसे ज्यादा जरूरी है|
अगर आपके परिवार में में एक सदस्य खुश नही तो क्या आप खुश रह पाएंगे क्या? नही ना? क्यों की आपकी ख़ुशी आपके परिवार की ख़ुशी पर निर्भर करती है| उसी तरह अगर आपके आस पास समाज में लोग खुश नही हैं तो कहीं ना कहीं आप प्रभावित होते हो| इसलिए सब की ख़ुशी के लिए हमें क्रियाशील भूमिका निभानी होगी और उसके लिए आपको पहले अपने मन को शांत रखना सीखना होगा|
आज की तकनीक की सहायता से हम जल्दी रोगमुक्त हो सकते हैं| उसी प्रकार हम प्राणत्व तकनीक की सहायता से अपने मन,मानस को बहुत जल्दी शांत कर सकते हैं|ध्यान करने से हमारा मन सकारात्मक रहता है और वो सकारात्मकता आपके आस पास क लोगो पर प्रभाव छोड़ती है| इसलिए ध्यान करना बहुत अतिमुल्य और आवश्यक है|

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